कबीर आश्रम मुंशीगंज में संत मंगल दास की स्मृति में हुआ सत्संग और भंडारे का आयोजन

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गुरु सोच समझ कर करें, आंखों से देखो,कानों से सुनो वहीं काम करो-संत तिहारू दास
माता -पिता की सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य
सतगुरु कबीर आश्रम मुंशीगंज में बुधवार को 11फरवरी को शरीर छोड़ चुके संत सत्य नाम मलंग दास उर्फ मंगल दास की पावन स्मृति में सत्संग और भंडारे का आयोजन किया गया। सत्संग में संत कबीर साहब की वाणी और शिक्षाओं पर विस्तार से संवाद हुआ। सत्संग,आरती और भंडारे में संत मलंग दास के सैकड़ों शिष्य, अमेठी, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और रायबरेली से दो दर्जन से अधिक कबीर पंथी साधु संत शामिल हुए।
सत्य नाम मलंग दास के शिष्य राम मिलन दास ने अन्य शिष्यों के साथ मिलकर भंडारे का आयोजन किया।1987 आश्रम की स्थापना में मुख्य योगदान करने वाले संत मंगल दास के शिष्य पूर्व प्रधान राम सुंदर, पलटूराम , परशुराम, रामबली, दुःखी आदि लोगों ने परिवार के साथ संतों की आरती की। प्रतापगढ़ से आए संत निहारू दास और पनियार के प्रेम दास ने संत कबीर की वाणी पर आधारित सत्संग किया।संत निहारू दास ने सत्यनाम कबीर साहब द्वारा धर्मदास को दी गई शिक्षाओं का उल्लेख किया और कहा कि बिन जाने जो गुरु करही,सो नर भवसागर परही।
गुरु सोच समझ कर करना चाहिए। दया, क्षमा,शील, संतोष,सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता और अनुशासन के गुर सहित रहस्यवाद को जानने वाला ही गुरु होता है। मानवता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। माता पिता की सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य है।काम, क्रोध,लोभ,मोह ,राग, द्वेष , ईर्ष्या,जलन यही पाप है ,जो एक दिन के गंगा स्नान से दूर नहीं हो सकते।
संत अयोध्या दास,संत राम दास, शारदा दास, रामबरन दास, रामदुलार, बामसेफ के जिला संयोजक संजीव भारती ,राम दुलारे, बुद्धि राम, मिश्री लाल, साधू राम, राकेश कुमार, कृष्ण कुमार,सोनू,प्रीतम दास , भोलानाथ, ललित कुमार, रामकुमार आदि मौजूद रहे।
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