Wednesday, February 25, 2026
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95 साल के बुज़ुर्ग का हो चुका था दाह संस्कार,अपनों के बीच पहुंचा तो जमकर लगे ठुमके

इस 95 साल के बुज़ुर्ग का हो चुका था दाह संस्कार, 46 साल बाद अपनों के बीच पहुंचा तो जमकर लगे ठुमके
सुलतानपुर (यूपी). यहां 95 साल के जस्सू बिंद दूल्हे की तरह सजे  घोड़े पर सवार थे, घोड़े के आगे-आगे लोग जमकर ठुमके लगा रहे थे। दरअस्ल ये सारी खुशियां इसलिये मनाई गई कि 46 साल बाद ये बुजुर्ग अपनों के बीच आया है। जिसे 15 साल पहले मरा हुआ मानकर परिवार वालों ने दाह संस्कार तक करा डाला था। ये मामला ज़िले से 70 किलोमीटर दूर कादीपुर कोतवाली अंतर्गत तवक्कलपुर नगरा गांव का है।
बड़े भाई के अंतिम संस्कार के साथ जस्सू का भी हुआ था दाह संस्कार
जस्सू के बड़े बेटे रामचेत के अनुसार उनके पिता का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था, अक्सर कर के वो कई-कई दिनों तक घर से लापता हो जाते थे। साल 1972 में जब वो लापता हुए तो फिर वो ढूंढे नहीं मिले।
रामचेत बताते हैं कि पिता को ढूंढ़ निकालने के लिये वो सभी तांत्रिक के पास तक गये, लेकिन कुछ पता नहीं चला।
क़रीब 15 वर्ष पूर्व हमारे बड़े पिता जी बंसू बिन्द की जब मौत हुई तो उस वक़्त हम लोगों पिता जस्सू को मरा हुआ मानकर उनका भी प्रतीकात्मक दाह संस्कार कर दिया।
आपको बता दें कि इसके बाद पत्नी प्रतापी ने मांग से सिंदूर पोंछ दिया और विधवा जीवन जीने लगी। जस्सू के चार बेटों और दो बेटियों ने भी अपने को अनाथ मान लिया। इनमें से दो बेटे और एक बेटी की शादी जस्सू की आंखों के सामनें हो चुकी थी।
नागपुर लेने गये थे परिजन
अब इसे कुदरत का करिश्मा ही कहेगें कि घर वाले जिसे मुर्दा मान चुके थे होलिका दहन की रात उसके ज़िंदा होने की उन्हें ख़बर मिल गई।
ग्राम प्रधान महेंद्र वर्मा को कोतवाली कादीपुर से सूचना दी गई कि जस्सू जिंदा हैं, और वो महाराष्ट्र के नागपुर में एक हास्पिटल में हैं।
फिर क्या था पूरे कुनबे में खुशी की लहर दौड़ उठी, आनन-फानन में परिजन जस्सू को लेने नागपुर गये।
नागपुर से जस्सू को लेकर जब परिजन गांव पहुंचे तो यहां पहले से खुशी में शराबोर गांव के लोग और परिजन ने बैंड बाजे के साथ
जस्सू का स्वागत किया। उन्हें दूल्हे की तरह सजाकर घोड़े पर बिठाकर सभी इलाके भर में नाचे।
समाज सेवा अधीक्षक अनघा राजे मोहरिल की मदद आई काम
समाज सेवा अधीक्षक अनघा राजे मोहरिल ने फोन पर बात करते हुए बताया कि बात साल 1985 की है जब सड़क किनारे पड़े जस्सू पर मेरी नजर पड़ी।
मैं उन्हें उठाकर अस्पताल ले गई और उनका ट्रीटमेंट शुरू कराया,  डा. फारूकी और डा. प्रवीण नक्खरे ने जस्सू का ट्रीटमेंट किया।
उन्होंने बताया कि मैं और डाक्टर्स बराबर जस्सू के घर वालों तक खबर करने की सोच में लगे रहे। लेकिन माइंड डिस्टर्बेंस के चलते जस्सू लखनऊ के अलावा कुछ नहीं बता पा रहे थे। इधर थोड़े दिनों पहले जस्सू ने  सुलतानपुर नाम लेना और बताना फिर कादीपुर बताना शुरु किया। अनघा और डॉक्टरों ने मुंबई तब हमने डीएम-एसपी से किसी सूरत कांटेक्ट किया और उन्हें घर तक पहुंचा दिया।
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