लखनऊ।
जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश की ओर से शनिवार को राजधानी के झूलेलाल वाटिका में तहफ्फुजे मुल्को-मिल्लत कांफ्रेंस का अधिवेशन किया गया। अधिवेशन में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं ने एक स्वर से एकता का नारा बुलंद करते हुए आपस में मिल-जुल कर रहने का संदेश दिया। धर्मगुरुओं ने कहा कि हिन्दुस्तान यहां रहने वाले सभी लोगों का घर है।

कांफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए जमीयत उलमा के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा कासमी ने कहा कि हिन्दुस्तान हमारा घर है। यहां रहने वाले आपस में लड़ेंगे तो मुल्क बर्बाद होगा और जमीयत ऐसा नहीं होने देगी। उन्होंने कहा, ‘न तेरा है, न मेरा है, यह हिन्दुस्तान सबका है, नहीं समझी गयी यह बात तो नुकसान सबका है, जो इसमें मिल गयी नदियां वह दिखलायी नहीं पड़ती, महासागर बनाने में मगर एहसान सबका हैÓ। हम देश में हजारों सालों से एक साथ मिल-जुल कर रहते आये हैं, कोई ताकत हमारा यह अजीमुश्शान साथ खत्म नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि हम जमीयत के प्लेटफॉर्म से संदेश देते हैं कि देश की बहुसंख्यक आबादी अमन पसंद है। गुलामी के दौर में अंग्रेजों के तलुवे चाटने वाले आज देशभक्त बने बैठे हैं। हम किरायेदार नहीं बल्कि मुल्क के हिस्सेदार और मालिक हैं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कानून के जरिए शरीयत में दखलंदाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।जमीयत उलमा के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि कमजोर वह होता है जिसका दिल कमजोर होता है। मुसलमान सब कुछ हो सकता है लेकिन बुजदिल नहीं हो सकता। आज निडर होने से ज्यादा जरूरी साबिर होना है, क्यों कि असल बहादुर वही होता है जो सब्र कर लेता है। देश में हालात खराब करने की कोशिश प्लानिंग है, ताकि लोगों में डर और खौफ पैदा हो। डर में ही गलती होती है, इसलिए जरूरी है कि दिल से डर निकालें। सब्र का फैसला करें तो डर निकलेगा। उन्होंने कहा कि इस्लाम और शिद्दतपसंदी एक साथ नहीं हो सकता। हमने देश को मर्जी से अख्तियार किया है। हम बाईचांस नहीं बल्कि बाई च्वाइस हिन्दुस्तानी हैं। हिन्दुस्तान हमारा मुल्क और वतन है। हम भारत के मूल निवासी हैं। हमने अपनों की फिरकापरस्ती से टक्कर ली, समझौता नहीं किया तो जब अपनों की साम्प्रदायिकता कबूल नहीं की तो किसी और की साम्प्रदायिकता कैसे बर्दाश्त करेंगे। मौलाना ने कहा कि हमें बादशाहों की बादशाहत से कोई वास्ता नहीं हमें तो अल्लाह के नेक वलियों से वास्ता है। कोई मौत से क्या डराएगा, हमारी जिंदगी मौत पर शुरू होती है।
कांफ्रेंस में डालीगंज मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने कहा कि अगर हम अपने बच्चों को नहीं समझा पा रहे हैं तो नाकाम हम हैं, बच्चे नहीं। उन्होंने कहा कि अंधेरा मिटाने के लिए एक जुगनू ही काफी है। भंते अशोक शाक्य ने कहा कि आज के युग में बम की नहीं बल्कि धम्म की जरूरत है। विश्व को अमन-चैन के रास्ते पर ले जायें। भदंत शांति मित्रा ने कहा कि ऐसी मिल्लत बनाएं जिसमें इंसानों को इंसान मानते हुए शांति के मार्ग पर चलें। कांफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए ने देश में बढ़ती साम्प्रदायिकता पर कहा कि देश की बहुसंख्यक आबादी मिल कर रहना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह इजलास एक ईश्वर, एक अल्लाह और एक परमात्मा को मानने वालों को तौहीद के झंडे के नीचे लाने के लिये है। देश की आजाद में सबने शहादत पेश की। काकोरी कांड में फांसी चढऩे वालों में एक आर्यसमाजी रामप्रसाद बिस्मिल थे तो दूसरे उनके भाई अशफाकउल्ला खां। उन्होंने प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा मोदी जी देश में नफरत की राजनीति नहीं चलने दी जाएगी। रोजगार, किसान, मजदूरों के साथ इंसाफ नहीं हो रहा है। अब चुप नहीं रहेंगे और 27 मार्च को दिल्ली में देश के चौकीदार से सवाल करेंगेमाम ईदगाह मौैलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि शरीयत से छेड़छाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि तलाक के कानूनों को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में लाखों महिलाएं विरोध कर रही हैं। उन्होंने 18 मार्च को टीले वाली मस्जिद पर तीन तलाक बिल के विरोध में होने वाले महिलाओं के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल होकर बिल का विरोध करने की मांग की। मौलाना ने केंद्र सरकार से बिल को कानून न बनाने की मांग की।





