STORY-BRIJENDRA BAHADUR MAURYA
परेशानी सबको होती है मुसीबत सबपर आती है लेकिन असली इंसान वो होता है जो उन मुसीबतो से डटकर सामना कर हालातो से लड़ता है।
इन्ही हालात से लड़कर ऊंचे मुकाम पर पहुचने वालो में से एक है सितांशु कुमार।

करीब 100 फीसदी दिव्यांग सितांसु कुमार एक बैंक में मैनेजर है। बैंक को संभालने के साथ साथ सितांसु जी ने दिव्यांगों की मुसीबतो पर अपने जीवन को समर्पित कर दिया है और शाश्वत जिज्ञासा नाम से एक संस्था बनाकर दिव्यांगों के लिए वो काम कर रहे है जो उनके मानसिक और शारिरिक स्तर को ऊंचाई पर ले जाये।
चूंकि खुद भी 100 फीसदी दिव्यांग होने पर ही सितांशु जी को ये महसूस हुआ कि दिव्यांग होना कोई बुराई नही है,भले ही कुदरत ने हमे ऐसा बनाया है लेकिन अगर हम चाहे तो अपनी कमजोरी को अपनी शक्ति बना सकते है।
दिव्यांगों को हौसला देने के काम में सितांशु को हौसला मिलता है और उन्हें खुशी होती है कि मेरा जीवन किसी के काम आ रहा है।
सरकारी पद पर होने के बावजूद सितांशु लखनऊ ही नही अन्य अलग अलग ज़िलों में दिव्यांगों के लिए काम कर रहे है।
दिव्यांगता किसी भी इंसान को शरीर से कमज़ोर करती है लेकिन हौसले अगर इंसान के ऊंचे है तो वो किसी भी मुकाम पर पहुँच सकता है।ऐसा कहना है शाश्वत जिज्ञासा के फाउंडर सितांशु कुमार का।
सितांशु जी अब तक जाने कितनों को दिव्यांगता से संबंधित उपकरण बांट चुके है।उनके इस काम मे और भी लोग सहयोगी रहते है।दिव्यांग ही नही बल्कि लड़कियों को जागरूकता कार्यक्रम भी अक्सर चलाया करते है जिसमे लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग सहित माहवारी के समय स्वच्छता एवं सही चीज़ का सही प्रयोग शामिल है।





