Saturday, February 28, 2026
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हजरत ‘सदरुश्शरिया’ एक बाअमल बड़े आलिम-ए-दीन थे – मौलाना असलम

हजरत ‘सदरुश्शरिया’ एक बाअमल बड़े आलिम-ए-दीन थे – मौलाना असलम
गोरखपुर। हजरत ‘सदरुश्शरिया’ अल्लामा मोहम्मद अमजद अली आज़मी अलैहिर्रहमां का 72वां उर्स-ए-पाक रविवार को बाद नमाज एशा नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में अदब व अकीदत के साथ मनाया गया।
इस मौके पर मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि हजरत ‘सदरुश्शरिया’ इल्म-ए-जाहिर व बातिन दोनों के संगम थे। आपकी पैदाइश यूपी के मशहूर कस्बा घोसी (मऊ) में 1296 हिजरी में हुई। आपके वालिद का नाम हजरत मौलाना हकीम जमालुद्दीन था। आपका घराना बहुत इल्मी था। आपने मदरसा हनफिया जौनपुर से तालीम हासिल की। इसके अलावा हजरत हिदायतुल्लाह रामपुरी व हजरत अल्लामा वसी अहमद सूरती से भी तालीम हासिल की। लखनऊ से इल्म-ए-तिब हासिल किया। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां अलैहिर्रहमां आप पर बहुत भरोसा करते थे और आपसे बहुत मुहब्बत करते थे। आला हजरत ने ही आपको ‘सदरुश्शरिया’ का लकब दिया था। आपकी खूबी की वजह से आला हजरत ने आपको पूरे हिन्दुस्तान का काजी-ए-शरा नियुक्त किया था। आपने बहारे शरीयत, फतावा अमजदिया, हाशिया तहताविया आदि कई नायाब किताबें लिखीं। आला हजरत के किए हुए कुरआन के उर्दू तर्जुमे का नाम ‘कंजुल ईमान’ है। इस तर्जुमे को आला हजरत से कराना भी हजरत ‘सदरुश्शरिया’ की मेहनत का फल है। आप आला हजरत के मुरीद व खलीफा थे।
मस्जिद के इमाम मौलाना असलम रज़वी ने कहा कि हजरत ‘सदरुश्शरिया’ एक बाअमल बड़े आलिम-ए-दीन थे। आपनेे कई बड़े-बड़े मदरसों में शिक्षण कार्य किया। आपके द्वारा लिखी गयी मशहूर किताब ‘बहारे शरीयत’ उर्दू जबान में बहुत आसान व सरल है। यह किताब इस्लामी निजाम का तर्जुमान है और जिंदगी के हर शोब-ए-रहनुमाई के लिए फिक्ही इंसाइक्लोपीडिया है। ‘बहारे शरीयत’ की शक्ल में हजरत ‘सदरुश्शरिया’ का मुसलमानों पर बड़ा एहसान है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जदीद निजामे तालीम तरतीब देने के लिए एक कमेटी बनाई गयी थी, जिसमें आपको भी शामिल किया गया था। हजरत ‘सदरुश्शरिया’ का 1367 हिजरी में इंतकाल हो गया। आपका मजार कस्बा घोसी (मऊ) में है। आज भी लोग आपके मजार-ए-पाक पर आकर अपने दामन को गौहरे मुराद से भरते हैं और हर साल आपका उर्स भी शान से मनाया जाता है। जिसमें पूरी दुनिया से अकीदतमंद शामिल होते है।
उर्स का आगाज कारी अंसारुल हक कादरी ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत से किया फिर नात-ए-रसूल पढ़ी। अंत में कुल शरीफ की रस्म अदा कर मुल्क में अमनों अमान, तरक्की व दुनिया में मुसलमानों पर हो रहे जुल्म से निजात की दुआ मांगी गयी। अकीदतमंदों में शीरीनी तकसीम की गयी।
इस मौके पर अलाउद्दीन निजामी, शाबान अहमद, मनौव्वर अहमद, रमजान अली, एडवोकेट तौहीद अहमद, शरीफ, बाबुल, सरफराज, आसिफ सर्राफ, अशरफ निजामी, एडवोकेट मो. शुएब अंसारी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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