सीएम के शहर में भगवान भरोसे जिला अस्पताल

मरीजों को नहीं मिल रहा स्टेचर, तीन दिन से खराब है इंसेफलाइटिस वार्ड का एसी
बर्न वार्ड में लगे एसी ने भी दिया जवाब पंखे के सहारे हैं मरीज
मनव्वर रिज़वी
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गोरखपुर । नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिला चिकित्सालय गोरखपुर बड़ी तेजी के साथ अपनी पुरानी स्थिति में लौट रहा है । वह स्थिति जहां सिर्फ और सिर्फ अव्यवस्थाएं ही थी । बृहस्पतिवार के दिन फिर एक पिता को स्टेचर या व्हीलचेयर के अभाव में अपने पुत्र को अपने हाथों पर लेकर इमरजेंसी से ओपीडी की तरफ तेज धूप में जाते हुए देखा गया । पूछने पर उसने बताया कि स्टेचर की मांग करने के बावजूद उसके पुत्र के लिए जिसके पैरों में प्लास्टर लगा हुआ है, स्टेचर उपलब्ध नहीं करवाया गया। ऐसा नहीं है कि यह दृश्य अस्पताल के आसपास के लोगों ने पहली बार देखा हो बल्कि पिछले चार-पांच दिनों के भीतर इस तरह की घटनाएं लगातार अपने आप को दोहरा रही है लेकिन अस्पताल प्रशासन अपनी कमियों को दूर करने के बजाये इस तरह की सच्चाई को सिरे से खारिज करता चला रहा है।
अब बात करते हैं इंसेफलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी की । वह बीमारी जिसने न जाने कितने घरों के चिराग को बुझा दिया, न जाने कितनी मांओं की गोद सुनी कर गई । शासन और प्रशासन के आला अधिकारी जहाँ लगातार इस बीमारी के प्रभाव को कम करने में जुटे हैं वहीं जिला अस्पताल प्रशासन इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों के प्रति कहीं से भी गंभीर नहीं लग रहा । बुधवार को इंसेफलाइटिस ओपीडी में तैनात डॉक्टर को यहाँ से हटा कर उनकी ड्यूटी कुत्ता काटने वाले मरीजों को देखने के लिए लगा दी गई वही तीन दिन से आईसीयू का एअरकंडीशन खराब है और सिर्फ एक एअरकंडीशन को चलकर किसी तरह इंसेफेलाइटिस आईसीयू को चलाया जा रहा है ।
ऐसा ही कुछ हाल बर्न वार्ड का भी है । यहां रखे गए मरीजों के लिए पूर्व में चार एसी की व्यवस्था की गई थी परंतु यह वार्ड अब केवल एक ऐसी के सहारे चल रहा है जबकि यहां के मरीजों को 24 घंटे एसी की आवश्यकता है । हद तो यह है कि यहाँ कभी-कभी इस एक एअरकंडीशन को भी बंद करके मुख्य दरवाजे को खोल दिया जाता है जिससे मरीजों के इंफेक्टेड होने का खतरा बना हुआ है।
इतना ही नहीं अब अस्पताल के वार्डों में आस-पास के दवा के दुकानदारों को डॉक्टर के साथ राउंड करते हुए देखा जा रहा है जिनके हाथों में बाकायदा यहाँ भर्ती मरीजों का बेड टिकट भी होता है।
कुल मिलाकर इस अस्पताल की पूरी व्यवस्था अब भगवान भरोसे चल रही है और इस व्यवस्था में सिर्फ और सिर्फ गरीब मरीजों का ही नुकसान और शोषण हो रहा है।





