
साल 2018 में भी पीएम मोदी काफी व्यस्त रहने वाले हैं। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, मोदी के विदेशी दौरे की शुरुआत स्विट्जरलैंड से हो सकती है। वह 22 जनवरी से स्विट्जरलैंड के दावोस में होने जा रही वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेंगे। आखिरी बार 1997 में तत्कालीन पीएम एचडी देवगौड़ा इस समिट में शामिल हुए थे। 20 साल बाद मोदी ऐसे प्रधानमंत्री होंगे, जो इस समिट में हिस्सा लेंगे।
व्यस्त रहेंगे जनवरी में
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत दौरे पर रहेंगे। इस दौरान नेतन्याहू और पीएम मोदी 16 जनवरी को भारत के प्रीमियम फॉरेन पॉलिसी फोरम- रायसीना डायलॉग को संबोधित करेंगे। बेंजामिन नेतन्याहू के दौरे से भारत और इजरायल के बीच रिश्ते अगले स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है।
इसके बाद जॉर्डन के राजा भी भारत दौरे पर आ सकते हैं। उनके दौरे से पश्चिम एशिया में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की विदेश नीति का क्या रुख होता है, यह तय होगा।
इसके बाद 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में आसियान देश के 10 नेता मौजूद रहेंगे। इससे दक्षिण-पूर्व एशिया में संतुलन बनाने वाली ताकत के रूप भारत की भूमिका को मान्यता मिलेगी। ऐसा पहली बार होगा, जब 10 विदेशी नेता देश के गणतंत्र दिवस समारोह में मौजूद होंगे।
फरवरी में भी हैं कई कार्यक्रम
इस दौरान मोदी के यूएई और फिलिस्तीन जाने की उम्मीद है। फ्रांस के राष्ट्रपति और कनाडा के प्रधानमंत्री की मेजबानी भी करने की वह तैयारी करेंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे में हिंद महासागर साझेदारी का मुद्दा सर्वोच्च प्राथमिकता में होगा। इंटरनेशनल सोलर अलायंस समिट भी फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे के समय में ही होगी।
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का दौरा भी इसी दौरान होने की उम्मीद है, जिसमें भारत और कनाडा के बीच व्यावसायिक और राजनीतिक रिश्तों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। पिछले एक साल में कनाडाई पीएम की कैबिनेट के करीब-करबी सभी अहम सदस्य भारत आ चुके हैं। फरवरी-मार्च के दौरान बिम्सटेक समिट के दौरान मोदी नेपाल भी जा सकते हैं।
अप्रैल से जून के दौरे
वह अप्रैल में पहली बार कॉमनवेल्थ समिट में हिस्सा लेने लंदन जाएंगे। इसके बाद एक जून को मोदी सिंगापुर का दौरा कर सकते हैं। इसके साथ ही वह चीन में एससीओ समिट में हिस्सा लेने के लिए भी जा सकते हैं।





