जौनपुर: वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में दो विद्युत उपकेंद्र बनाया जाना है। इसका काम शुरू हुए बगैर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यदायी संस्था को 12 करोड़ का भुगतान भी कर दिया गया जबकि नियमानुसार काम शुरू करने के लिए 33 फीसदी से अधिक का भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय परिसर में बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए 22 करोड़ की लागत से 33 केवीए और 11 केवीए के दो विद्युत उपकेंद्रों का निर्माण कराया जाना है। उपकेंद्रों के निर्माण के लिए लखनऊ की एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने 24 फरवरी को कार्यदायी संस्था को 12 करोड़ का भुगतान भी कर दिया है। कार्यदायी संस्था को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसके करीब 50 प्रोजेक्ट कई जिलों में अधूरे पड़े हैं। बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यदायी संस्था को कार्य शुरू करने से पहले ही 12 करोड़ का भुगतान कर दिया। उपकेंद्र के निर्माण के लिए मनमाने तरीके से मानक को ताक पर रखकर भुगतान कर दिया गया। कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल का कहना है कि कार्यदायी संस्था को भुगतान करे की बात पता नहीं है। यदि ऐसा हुआ होगा तो किन्हीं नियमों के तहत ही हुआ होगा।

अजवद क़ासमी की रिपोर्ट
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