Wednesday, March 4, 2026
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विधायिका निर्मित व्यवस्था के बाहर जाकर नहीं की जा सकती सैनिक की बर्खास्तगी: न्यायमूर्ति डी.पी.सिंह                        

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विधायिका निर्मित व्यवस्था  के बाहर जाकर नहीं की जा सकती सैनिक की बर्खास्तगी: न्यायमूर्ति डी.पी.सिंह                        

सेना को विधायिका निर्मित व्यवस्था के बाहर जाकर कार्यवाही करने की छूट नहीं:न्यायमूर्ति डी.पी.सिंह                                      

कतार में खड़े ‘अंतिम-सैनिक’ के पक्ष में सेना कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय से मिला न्याय: विजय कुमार पाण्डेय

सेना कोर्ट लखनऊ के न्यायमूर्ति डी.पी. सिंह ने मथुरा निवासी सिपाही अनुराग मिश्रा के बर्खास्तगी आदेश को सेना के सभी लाभ देते हुए निरस्त कर दिया प्रकरण यह था कि अनुराग मिश्रा 2003 में सेना में सिपाही के रूप में भर्ती हुआ था वर्ष 22 जनवरी, 2004 में कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी का आदेश हुआ कि उसने भर्ती के समय मेडिकल चेक-अप के दौरान अनुचित तरीका अपनाया था,1 मई, 2006 को बतौर गवाह उपस्थित हुआ और उसे 20 जनवरी,2017 को सेना द्वारा कारण-बताओ नोटिस दी गई तदोपरांत 28 फरवरी 2007 को उसको सेना की धारा-20 और रुल-17 के तहत बर्खास्त कर दिया गया l पीड़ित सैनिक नें वर्ष 2008 में माननीय इलाहाबाद उच्च-न्यायालय, के समक्ष रिट याचिका संख्या 282/2008 दायर की जो वर्ष 2010 में सेना कोर्ट को स्थानांतरित कर दी गई और सेना कोर्ट ने सुनवाई प्रारम्भ की और कहा कि बतौर गवाह उपस्थित याची को ही मुलजिम बता दिया गया lए.ऍफ़.टी.बार एसोसिएशन के महामंत्री विजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि माननीय सेना कोर्ट ने कहा कि यह सुस्थापित कानून है कि यदि किसी कि प्रतिष्ठा और चरित्र पर प्रभाव डालने वाला तथ्य सामने आता है तो उसे सेना के नियम-180 के तहत अवसर दिया जाना बाध्यकारी है सुप्रीम कोर्ट ने मेज.जनरल इन्द्रजीत कुमार बनाम भारत सरकार एवं अन्य और सुरेंदर कुमार साहनी बनाम थल-सेनाध्यक्ष के मामले में व्यवस्था दी है रही बात धोखा-धड़ी की तो इसके लिए महाराष्ट्र राज्य बनाम बुद्धिकोटा सुहराव ए.आई.आर.1989 एस.सी.2282 में दी गई व्यवस्था के अनुरूप प्राकृत्रिक-न्याय का अनुपालन किया जाना चाहिए और धोखा-धड़ी के मामले में कोर्ट-मार्शल अनिवार्य है जो कि नहीं किया गया और दूसरी तरफ ‘जनरल आफिसर कमांडिंग-इन-चीफ’ के आदेश पर बगैर तार्किक आदेश के कमांडिंग आफिसर ने याची को बर्खास्त कर दिया गया जो कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 के अनुसार मनमानी कार्यवाही है . विजय कुमार पाण्डेय ने आगे बताया कि कोर्ट ने कहा कि सेना को विधायिका निर्मित व्यवस्था के बाहर जाकर कार्यवाही करने की छूट नहीं है जबकि सेना-अधनियम की धारा-122 का पालन नहीं किया गया और तीन साल बाद कार्यवाही की गई जो कि वर्जित है l सेना कोर्ट ने कामता प्रसाद, पटेल चुन्नीभाई दाजिभा, मार्टिन बर्न लिमिटेड, एम्.वी.एलिजाबेथ, स्वतोंतपीठ, वास्कोडिगामा, सुल्ताना बेगम, एवं ह्दीप सिंह का हवाला देते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च-न्यायालय ने इन मामलों में जो व्यवस्था दी है उसका पालन नहीं किया गया इसलिए याची को उसको सेना के सभी लाभों के साथ निष्कासन आदेश निरस्त किया जाता है l पाण्डेय ने कहा कि यह निर्णय सेना के लिए महत्वपूर्ण और सैनिक के लिए लाभकारी है जो भविष्य में अन्य मामलों में लाभकारी सिद्ध होगा l  

https://www.youtube.com/watch?v=eBIyfSqbc0o


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