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“ये वो शहर तो नहीं “शीर्षक से शुरू हुआ परिचर्चा की नई श्रृंखला
“आजाद भारत का सपना” के तहत साझी दुनिया संस्था ने “ये वो शहर तो नहीं “शीर्षक से परिचर्चा की नई श्रृंखला शुरू की

यह शीर्षक सामाजिक सांस्कृतिक और स्त्री संबंधी मुद्दों पर शुरू किया गया है शीर्षक का व्याख्यान मुख्य वक्ता एडवोकेट सैफ महमूद ने किया।
लखनऊ में आज साझी दुनिया संस्था ने अपनी नई श्रृंखला की शुरुआत की इस श्रृंखला का ” ये वो शहर तो नहीं” शीर्षक नाम दिया गया।
यह सामाजिक, सांस्कृतिक और स्त्री – संबधी मुद्दों पर वार्ता और परिचर्चा का नया माध्यम है जिसकी व्याख्यान सुप्रीम कोर्ट के सुप्रसिद्ध वकील सैफ महमूद ने किया।
उन्होंने अपना व्याख्यान संविधान के नजरिए से आजाद भारत का सपना के तहत किया।
सैफ महमूद ने अपने व्याख्यान की शुरुआत भारत के संविधान से की उन्होंने बताया कि संविधान ने ही आजाद भारत का सपना देखा था जिसे संशोधित कर भारत के सपने को कम कर दिया है।
आगे बात करते हुए कहा कि भारत के संविधान में 350 से ज्यादा धाराएँ है पर अबतक 101 से ज्यादा संबोधित हो चुके हैं जिसकी वजह से भारत के सपनों को तलाशना मुश्किल हो गया है।
अपने व्याख्यान में आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट के तहत कुछ संविधान के धाराओं में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है जिसमें आजाद भारत के सपनों को ढूंढ सकते हैं।
नागरिकों के मौलिक अधिकार में परिवर्तन नहीं किया जा सकता जिसमें अधिकारों की रक्षा की जिम्मेदारी होती है।

इस अधिकार में नागरिकों के मुल कर्तव्य के बारे में जिक्र किया गया है
https://www.youtube.com/watch?v=z128H3xSUCk&t=1s





