मुन्ना बजंरगी की हत्या से जेल की सुरक्षा की पोल खुली
-जेल में हथियार कैसे पहुंचे
-किसके आदेश से झांसी से बागपत लाया गया था
सैयद निजाम अली
लखनऊ। बागपत के जिला जेल में सोमवार की सुबह माफिया डान मुन्ना बजरंगी की हत्या की जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यायिक जांच के आदेश दिये तो वही इस हत्याकांड में जेल की सुरक्षा व्यवस्था की असली पोल खोल दी।
मुन्ना बजरंगी जिसका असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह था को कल ही झांसी से कड़ी सुरक्षा में बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के मामले में लाया गया था। मुन्ना बंजरगी की आज सुबह करीब ६.३० जेल में गोलियां मारकर हत्या कर दी गयी।
इससे जेल की सुरक्षा के साथ ही साथ कई अन्य चीजों पर सवाल उठ रहे है। पूर्व पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह के मुताबिक किसी माफिया को एक जेल से दूसरे जेल में शासन की अनुमति से शिफ्ट किया जाता है।
फिर जेल में जब आईजी जेल भी जाता है तो पहले वह रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है और उसके बाद उसकी जांच होती है कि वह कोई चीज लेकर तो जेल के अंदर नहीं जा रहा है फिर जब वह निकलता है तब भी उसकी जांच होती और हस्ताक्षर करता हैै। फिर जेल में हथियार कैसेे पहुंच गये। मुन्ना बजरंगी के करीब एक दर्जन गोलियां मारी गयी और वह वही ढेेर हो गया। बगैर जेल अधिकारियों व जेल कर्मियों की मिलीभगत के जेल के अंदर हथियार कैसे पहुंच गये। दस दिन पहले ही मुन्ना बजंरगी की पत्नी नेे अपने पति की हत्या किये जाने की आशंका व्यक्त की थी। इसका मतलब मुन्ना बंजरगी के झांसी से बागपत लाने के बाद ही रविवार रात में जेल में हथियार पहुंच गये थे।मुन्ना बजंरगी पिछले शुक्रवार को ही अपने साले पुष्पजीत सिंह की तेरहवी में लखनऊ के विकास नगर आया था। साले की गैंगवार में पिछले दिनों लखनऊ में हत्या कर दी गयी थी। मुन्ना बंजरगी को २९ अक्तूबर २००९ को दिल्ली पुलिस ने मुंबई के मलाड इलाके से गिरफ्तार किया था। मुन्ना बंजरगी पर २९ नवंबर २००५ को लखनऊ में भाजपा विधायक कृष्णानंग राय की हत्या का केस था। इस हत्याकांड में छह अन्य लोग मारे गये थे। इसी सिलसिले में वह जेल में था। मुन्ना बंजरगी ने २० साल में करीब ४० हत्याये की थी। वह विधायक व डान मुख्तार अंसारी का पहले दाहिना हाथ लेकिन बाद में वह उससे अलग हो गया था।
सबसे ताजुब्ब की बात तो यह है कि जिस हथियार सेे मुन्ना बंजरगी की हत्या की गयी वह पुलिस बरामद नंहीं कर सकी है। इस हत्याकांड मेें सुनील राठी का नाम आ रहा हैै। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद शासन नेे बागपत के जेेलर, डिप्टी जेलर सहित चार पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया हैै। इस हत्याकांड से बागपत से लेकर लखनऊ तक हलचल मची है। यह हत्या तब हुई जब आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के साथ नोएडा में मोबाइल फैक्ट्री का उद्घाटन करने आये थे





