महात्मा गांधी के जीवन मे अनेक आंदोलन हुए जिसमे से काफी देश की आजादी के लिए हुए जिसके माध्यम से जनमानस को भारत की आजादी के लिए उद्देलित करना था ।किंतु चम्पारण का सत्याग्रह भारतीय जनमानस का पहला अहिंसक आंदोलन था इस आन्दोलन की विशेषता यह थी कि इसके माध्यम से क्षेत्र के किसानों को उद्देलित कर अंग्रेज शासको की नीति का विरोध किया गया था ।

अंग्रेजो शासको गरीब किसानों को नील की खेती करने के लिये बाध्य कर रहे थे ।जिसके माध्यम से प्रति 20 कट्ठा जमीन में से 3 कट्ठे की जमीन पर नील की खेती करनी पड़ती थी यह नील की खेती किसानों के लिए परेशानी पैदा करने वाली थी ।इसी का विरोध कर ग़ांधी ने किसानों को साथ लेकर के आंदोलन किया और उसमें वो सफल भी हुए ।इसी चम्पारण सत्याग्रह को ध्यान में रखकर शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गांधी सदावना यात्रा का आयोजन किया गया है ।
लखनऊ राजधानी में गांधी सद्भावना यात्रा का पड़ाव उत्तरप्रदेश की संस्थाओ के लिए सन्देश का प्रतीक माना जा सकता है ।यहाँ से जो सन्देश यात्रा के माध्यम से प्रसारित होगा उसका असर सम्पूर्ण प्रदेश पर होने वाला है।ये यात्रा 12 मार्च को चम्पारण क्षेत्र के विथेरवा गांव से प्रारम्भ होकर बेतिया ,मोतिहार से फैज़ाबाद होते हुए लखनऊ आयी है लखनऊ से कानपुर, हापुड़ होते हुए राजघाट दिल्ली पहुचेगी ।यात्रा के माध्यम से गांधी के विचार शांति सदावन तथा भाई चारे को बढ़ावा देने के लिए और कमजोर तबके का सशक्तिकरण करने के लिए यह यात्रा सफल माध्यम बनती नजर आ रही है ।
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