Friday, February 27, 2026
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HomeMarqueeप्रभु का नित्य सुमिरन करने से होगा दाम्पत्य जीवनसुखमय:  मिथिलेश नन्दिनीशरण 

प्रभु का नित्य सुमिरन करने से होगा दाम्पत्य जीवनसुखमय:  मिथिलेश नन्दिनीशरण 

प्रभु का नित्य सुमिरन करने से होगा दाम्पत्य जीवनसुखमय:  मिथिलेश नन्दिनीशरण
– नवाबगंज के सिद्धपीठ जागेश्वर धाम में चल रही रसमयी श्रीमद् भागवत कथा
कानपुर महानगर। बाबा जागेश्वर धाम नवाबगंज मे‘‘पुरूषोत्तम मास’’ के अवसर पर विश्व कल्याण की कामना के साथ 20 मई से 30  मई 2018  तक चलने वाले श्रीमद भगवतकथा कथा सप्ताह के षष्ठ्म दिवस में आज प्रातः 9 बजे से 3 बजे तक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रीघाम अयोघ्या से पघारे संत शिरोमणि  श्री मिथिलेश नन्दिनीशरण जी महाराज व चित्रकूट से परीक्षित के रूप मे पधारे आचार्य श्री नवलेश जी ऋषिकेश से विज्ञानानंद जी महाराज, लक्ष्मण शिला अयोध्या से पधारे आचार्य मैथलीशरण महाराज (क़िलाधीश)जी के पावन सानिध्य में 51 आचार्यों द्वारा भागवत कथा का मूल पाठ तथा अनुष्ठान श्री महाराज जी की अमृतवाणी के साथ ख्योरा नवाब गंज स्थित‘‘जागेश्वर घाम मंदिर प्रांगण’’ में आज षष्ठ्म दिवस सम्पन्न हुआ।
एवं सायंकाल 4 बजे से 8 बजे तक भगवतकथा के षष्ठ्म दिवस के अवसर पर आचार्य श्री मिथिलेश नन्दिनीशरण जी महाराज ने श्रीकृष्ण रूकमणि विवाहोत्सव के अवसर पर प्रवचन करते हुए कहा कि हमारे जीवन में विवाह एक धार्मिक संस्कार के रूप में है जो कि भोग न होकर योग है भटके मन को इस योग क्रिया द्वारा मन चंचलता को कर शाँत  जीवन प्रक्रिया का निर्वहन होता है श्री रूकमणि हरण प्रेम का परिचायक तो था परन्तु शास्त्र सम्मत नही था इसलिये विवाह को सामाजिक मान्यता दिलाने के लिये श्रीकृष्ण जब द्वारिका आये तो विश्व रचयिता भगवान ब्रम्हाा जी की उपस्थिती में वैदिक रीति के साथ विवाह सम्पन्न कराया गया। प्रेम करना गलत नही बल्कि मर्यादा रहित हो जाना समाजिक दृष्टि से गलत है यहाॅ श्रीकृष्ण ने प्रेम और मर्यादा दोनो का पालन कर समाज के चंचल मन को एकाग्रता प्रदान करते हुये समाजिक जीवन दर्शन व वंश संचालन की मर्यादित शिक्षा दी। आज प्रायःसमाज मे प्रेम विवाह का अधिक चलन हो गया है पर
कुछ ही समय बीतने के बाद वह प्रेम न जाने कहा चला जाता है और जीवन में कटुता आ जाती है क्यो? यदि प्रेम करना ही है तो भगवत से प्रेम करो मन को एकाग्र कर प्रभु का सुमिरन करे और मर्यादा के लीलाधारी भगवान श्री कृष्ण की आठो पटरानियों के नाम क्रमशः रूकमणि, जामवन्ती, सत्यभामा, मित्रविन्दा, नग्नजिती, लक्ष्मणा, भद्रा, कालिन्दी का नित्य सुमिरन करने से जीवन मे कभी कटुता नही आयेगी दाम्पत्य सुखमय हो जायेगा। कल सातवें दिन सायं काल में सांय 4 बजे से 8 बजे तक तक सुदामा चरित्र व्यख्यान के साथ श्रीमद भगवतकथा कथा सप्ताह  का समापन होगा यह बात ब्रम्हाण्डोत्सव वैदिक विज्ञान मंडल कार्यक्रम के संयोजक आचार्य श्री कुमार गौरव शुक्ल, ने बताई।
 उक्त कार्यक्रम में प्रमुख रूप से ब्रम्हाण्डोत्सव वैदिक विज्ञान मंडल के संरक्षक व कार्यक्रम के संयोजक आचार्य श्री उमेश दत्त शुक्ल जी योगेश भसीन, प्राण श्रीवास्तव वरुण भसीन, अनूप द्विवेदी, दीपक तिवारी,कौस्तुभ शुक्ल, विजय सिह, वरिष्ठ पत्रकार कमल मिश्र सहित सैकडा़े की संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे।
सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट
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