Join us-9918956492———————————
पिता का सपना था बिटिया गोल्डमेडलिस्ट बने
गोल्डमेडल की तमन्ना तो हर किसी को होती है पर उसे पाने की उत्कृष्ट लगन हर किसी को नहीं होती।
गोल्डमेडल न पाने की वजह बहुत है पर पाने की सिर्फ एक वह है। सही दिशा के प्रति कड़ी मेहनत करना। संसार में ऐसे कम ही लोग होते है ।जिन्हें जीवन में सही दिशा के साथ कड़ी मेहनत कर उन्हें सफलता हाशिल करने का मौका मिलता हैं।

बात कर रहे बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय में पढ़ रही उन दो छात्राओं की जिन्होंने कड़ी मेहनत और लगन के साथ इस मुक़ान पर पहुँची कि जिन्हें गोल्डमेडल से नवाजा जाए।
विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में पढ़ रही दो सगी बहन अनिता और पूजा को 15 दिसम्बर के दिन भारत के राष्ट्रपति माननीय रामनाथ कोविंद के हाथों गोल्डमेडल से नवाजा जाएगा ।
ये दोनों छात्राएं पिछले सत्र 2015 व 2016 में अपनी- अपनी क्लास में टॉप कर गोल्डमेडल की हकदार बनी
इनमें पूजा जो कि 2015 में विश्वविद्यालय के मैथमेटिक्स डिपार्टमेंट से 83 % प्राप्तांक पाई वहीं अनिता सन 2016 में हिंदी डिपार्टमेंट से 78 % प्राप्तांक पाकर अपनी डिपार्टमेंट में सबसे ज्यादा नंबर लाकर टॉप करी जिन्हें विश्वविद्यालय के नियमानुसार राष्ट्रपति के हाथों दो गोल्डमेडल से नवाजा जाएगा।
आप को बता दे लखनऊ थाना पारा के आशुतोष नगर के रहने वाले स्व जिया लाल की
ये दोनों बेटियां है, जिन्होंने परिवार के साथ ही साथ अपनी बेटीयों की शिक्षा के लिए नगर में ही ऑटो चलाते रहें और उसी पैसों से परिवार का खर्चा व बेटियों की शिक्षा की भी देख रेख करते रहे।
पूजा से जब इस विषय के बारे में पूछा गया तो बताती है कि आज दौर में कॉम्पिटिशन बहुत है चाहे वो शिक्षा की कोई फील्ड हो और खास कर ऐसी परिस्थितियों में जब मंजिल नज़दीक हो और कठिनाइयों की मार पड़ी हो। तो उस समय अपनी मंजिल को पाना बहुत मुश्किल होता है ।
आगे बताती है कि विश्वविद्यालय में जब मैंने दाखिला लिया तो उस समय मेरे परिवार की परिस्थिती कुछ ठीक थी पर पिता जी की मौत के बाद मानो एक पल के लिए सब कुछ खत्म हो गया लेकिन मैंने हार नहीं मानी। हालांकि पिता की मौत के बाद हम दोनों की शिक्षा को पूरा कराने का कोई और साधन नहीं था पर हमनें कभी हार नहीं मानी घर पर ट्यूशन पढ़ाकर अपनी शिक्षा को पूरा किया और अब वो मुक़ान भी आ गया जिसे हम दोनों के लिए अहम है।
वही अनिता बताती है कि मेरे पिता का सपना था कि हम दोनों को अच्छे मुक़ान पर देखे और अब वो दिन भी आ गया जब दोनों बहनें पिता के सपनों को पूरा करेंगें।
आगे जब गोल्डमेडलिस्ट में नाम आने के बाद यह पूछा गया कि अब तो आप पिता जी के सपनों को पूरा करने जा रही है तो इस समय आप को कितनी ख़ुशी मिल रही है ।
बताती है कि ख़ुशी तो है लेकिन उतनी नहीं जितना पिता जी के रहने के बाद मिलती , क्योंकि की हम दोनों की चाह यह भी थी कि पिता जी के साथ ही हम उनके सपनों को पूरा करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया, गोल्डमेडल तो मिलेगा पर पिता जी साथ नहीं हैं।





