पांच गायो की सेवा की शुरुआत करने वाले आज ढेड़ सौ गायो की देखभाल अपनी कमाई से कर रहे है

गायो की सेवा के नाम पर नही लिया आज तक चंदा,कमाई का पच्चीस फीसदी गायो के नाम

मोहनलालगंज।निगोहां गाँव मे स्थित नन्दनी गौ शाला में बीते छह वर्ष से समाज सेवी द्वारा बीमार पशुओं की सेवा में तत्पर है शुरुआत में 15 जानवरों की सेवा शुरू की थी आज 150 जानवरों की सेवा मैं जी जान से लगे हैं। बीमार, चलने-फिरने में लाचार आवारा पशुओं की सेवा कर रहे हैं। इसके लिए लाखों रुपए खर्च करते है, इन पशुओं में सबसे ज्यादा गाय हैं।
देवरहा बाबा की प्रेरणा से गौशाला की नीव पड़ी–
जमीन के व्यवसाय से जुड़े सतेन्द्र तिवारी ने आवारा पशुओं की सेवा के लिए ब्रह्म ऋषि देवरहा बाबा प्रेरणा ट्रस्ट बनाया है। ट्रस्ट में वह महामंत्री व सतीश मिश्रा अध्यक्ष हैं। 2012 में इस ट्रस्ट के जरिए ढ़ाई बीघा जमीन खरीद कर नंदनी गौशाला की नींव रखी गई। शुरुआत में भवरेश्वर बाबा मंदिर से पांच गाय खरीद कर आश्रम में लाई गई। आश्रम में देवरहा बाबा की प्रतिमा स्थापित की गई।
किसी से नही ली मदद—–
सतेन्द्र ने दावा किया कि इस आश्रम को चलाने के लिए उन्होंने किसी से कोई मदद नहीं ली। उन्होंने बताया कि अपनी आमदनी का 25 फिसदी लाभ वह गौशाला में खर्च करते हैं। जिससे अब आश्रम के पास 12 बीघा से अधिक जमीन हो गई है। दो बड़े-बड़े खुले हाते बनाए गए हैं। जिनमें पशु दिन में घूम कर आराम करते हैं। शाम को उनको चारा खाने के लिए बांध दिया जाता है। गर्मी से बचने के लिए यहां दर्जनों पंखे लगाए गए हैं। छह मजदूर प्रतिदिन सेवा करते हैं। आश्रम में ही पशुओं के लिए हरा चारा उगाया जाता है। और वही इन गायो से होने वाला दूध यहां बेचा नहीं जाता है।
गऊ सेवा से होती है शुरुआत——-
सतेन्द्र के भाई जावेन्द्र तिवारी ने बताया की सुबह उठकर वह लोग पहले आश्रम आते हैं। यहां पर पशुओं की सेवा करने के बाद दिन की शुरुआत करते हैं।
छह साल से जुम्मन कर रहे गायों की सेवा——–
निगोहा के आशीष त्रिपाठी बताते है कि जुम्मन पिछले कई सालों से यही पर रहकर गायो की सेवा करते है।और जुम्मन कहते है कि गायो की सेवा करने से उन्हें सुकून मिलता है।
गौरक्षा और सेवा का संदेश लेकर घुमा करती वैन——गौशाला के मेम्बर योगेश बताते है कि गौरक्षा और गौसेवा का संदेश लेकर यहां की एक वैन पूरे प्रदेश भर में प्रचार प्रसार किया करती है।और इसके लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किये जाते है।





