
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो राजनीतिक कैदियों को आमतौर पर जेल में कुछ सुविधाएं दी जाती हैं। रिपोर्ट् के अनुसार लालू स्पेशल सीबीआई कोर्ट में दुमका खजाना मामले के लिए जब पेश हुए तो साढ़े तीन साल की सजा होने के बाद भी किसी तरह की शिकन नहीं दिखाई दी बलके जिस जज ने उनको चारा घोटाले में सज़ा दी लालू उन्ही के साथ हस्ते मुस्कुराते दिखे। बता दे लालू को जज शिवपाल सिंह ने चारा घोटाले में सज़ा सुनाई थी।
लालू ने जज से जेल में साधारण कैदी की तरह बर्ताव किये जाने पर शिकायत की जिस पर जज का उत्तर था कि नियम सभी के लिए एक है। लालू ने जज से दुमका खजाना मामले में फैसला सुनाने के लिए कहा, ‘सर, मुझे प्लीज ढाई साल की सजा इस मामले में दीजिएगा’ जिस पर जज ने सख्ती से कहा कि आप इस तरह न बोलें। इस तरह की बातें यहां नहीं होनी चाहिए।
इससे पूर्व जज ने लालू से उन्हें जेल में होने वाली दिक्कतों के बारे में पूछा तो लालू ने शिकायत की कि जेल प्रशासन उन्हें पार्टी कार्यकर्ता और अन्य लोगों से मिलने की इजाजत नहीं देते। इस पर जज ने कहा कि आंगतुकों को जेल के नियमों का पालन करने पर ही आपसे मिलने दिया जाएगा, इसलिए मैंने आपके लिए खुली जेल की सिफारिश की थी। लालू ने इसका उत्तर देते हुए कहा, ‘अगर कार्यकर्ताओं को खुली जेल में रोका जाएगा तो वहां नरसंहार हो सकता है। झारखंड के सभी 20 हजार पुलिसकर्मियों को सुरक्षा में तैनात होना पड़ेगा। इस पर जज ने कहा कि आप चिंता न करें ऐसा कुछ नहीं होगा।
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