Friday, February 27, 2026
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जनता मंहगाई से परेशान मालामाल हो रहे है मुनाफ़ा ख़ोर

जनता मंहगाई से परेशान मालामाल हो रहे है मुनाफ़ा ख़ोर
ख़ालिद रहमान
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की जनता को अनेक टैक्स से बचा कर एक टैक्स मे लाने के लिए लगाई गई जीएसटी को तो कड़ी आलोचना के बाद देश मे लागू कर दिया और कामयाबी भी मिली लेकिन देश मे चाहे जीएसटी लगा दो या इससे भी सख्त कानून लेकिन बेलगाम हो चुके मुनाफा खोर मंहगाई को अपने हिसाब से बढ़ा कर देश की जनता को ठग रहे है। ये वो मुनाफ़ा खोर है जो जगह और हालात के हिसाब से सामान की क़ीमत खुद तय कर उसे मनमाने दाम पर बेच कर न सिर्फ जीएसटी को मुंह चिढ़ा रहे है बल्कि देश की जनता को खुले आम लूट रहे है। इन मुनाफ़ा खोरो के लिए सामान पर लिखी एमआरपी भी कोई मायने नही रखती है। मनमाने तरीके से बेहिसाब मुनाफ़ा कमा रहे ये ऐसे दुकानदार है जो ऐसी जगहो पर बैठे है जहां आने जाने वाले लोग इनसे महंगे दामो पर सामान खरीदने के लिए मजबूर है और जानबूझ कर लुट भी रहे है लेकिन ये मुनाफ़ा खोर न किसी कानून को मान रहे है और न ही एमआरपी को। उदाहरण के तौर पर आप देश के किसी भी हवाई अडडे चले जाए और वहां की कैन्टीन से एक पानी की बोतल खरीदे हवाई अडडे की कैन्टीन पर बिकने वाली पानी की बोतल पर बाज़ार से अधिक एमआरपी दर्ज होगी उस पर सितम की दुकनदार इस एमआरपी को भी कोई मायने न देकर उससे भी ज़्यादा कीमत खुलेआम वसूल रहे है। हम अगर लखनऊ के चैधरी चरण सिंह इन्टर नेशनल एयरपोर्ट की ही बात करे तो यहंा की कैन्टीन पर बिकने वाली एक लीटर की पानी की बोतल पर 30 रूपए एमआरपी छपी है लेकिन यहंा का दुकानदार इस पानी की एक बोतल का ग्राहक से तीस रूपए नही बल्कि 40 रूपए वसूल रहा है। पानी की बोतल को अगर छोड़ दे तो यही हाल कोल्ड ड्रिंक की बोतल का भी है। हवाई अडडे के बाहर चलने वाली कैन्टीन पर बिकने वाले आलू के समोसे की कीमत सुन कर आप चैक पड़ेगे यहां समोसे की कीमत 15 रूपए है यही समोसा अगर बाज़ार मे खरीदा जाए तो सिर्फ 5 रूपए मे मिलता है। यहा की कैन्टीन पर कोई भी सामान तीन गुना कीमत पर बेचा जा रहा है और खादय विभाग व आयकर विभाग आॅखे बन्द किए बैठा है। ये तो हुई हवाई अडडो के बाहर चलने वाली कैन्टीनो की मुनाफ़ा खोरी की बात अब चलिए उन मुनाफ़ा खोरो के पास जो शहरो की आम बाज़ारो मे बैठे हुए अपनी दुकाने चला रहे है। उदाहरण के तौर पर लखनऊ के मशहूर इदरीस की बिरयानी की अगर बात करे तो आपको मुनाफा खोरी का अन्दाज़ा हो जाएगा। यहा हाफ़ प्लेट बिरयानी की कीमत सौ रूपए वसूली जा रही है सौ रूपए मे बिकने वाली एक प्लेट बिरयानी की अधिक्तम लागत अगर जोड़ी जाए तो 50 रूपए से ज़्यादा नही आ सकती अब एक प्लेट पर 50 रूपए का मुनाफ़ा क्या जायज़ है। और एक प्लेट पर इतना भारी मुनाफ़ा ग्राहक से वसूल कर क्या इसका टैक्स सरकार को दिया जा रहा है ये भी पक्का नहीं है क्यूंकि एक प्लेट बिरयानी की न तो कोई रसीद ही दी जा रही है और न ही ये बताया जा रहा है कि इस बिरयानी की कीमत किसने और किस आधार पर तय की है। इदरीस की बिरयानी हो या टुन्डे के कबाब लज़ीज़ अल दरबार का अन्डा रोल हो या शहर के तमाम होटलो मे बिकने वाले शाकाहारी व्यंजन कुल मिला कर खुले मे बिकने वाले खाने की हर वस्तु पर सरकार की तरफ़ से कोई मूल्य निर्धारित नही है और इसका फायदा उठा कर दुकानदार ग्राहको से मनमानी कीमत वसूल कर रहे है। ये तो महज़ एक उदाहरण है सरकार को चाहिए कि वो इस तरह की मुनाफ़ा खोरी पर लगाम लगा कर देश की जनता को मंहगाई की ज़ंज़ीरो से निजात दिलाने के लिए मुल्य नियंत्रण के लिए एक पावर फुल कमेटी बना कर उसे भारत के बाज़ारो मे भेजे और इस तरह की मुनाफ़ा खोरी करने वालो के सामान का मूल्य निर्णारण करे ताकि देश मे बढ़ती महंगाई पर लगाम लगे सरकार फ़ज़ीहत से बचे और जनता राहत की संास ले सके। देश के बड़े शहरो मे चलने वाले किसी भी मल्टी प्लेक्स सिनेमा हाल आप चले जाईये यहंा भी हाल के अन्दर मनमानी कीमत वसूली जा रही है । सिनेमा हाल के बाहर जो पाॅप कार्न 20 रूपए मे मिलता है उसकी कीमत यहां 150 रूपए वसूली जा रही है 10 रूपए मे बिकने वाली कोल्ड डिंªक की बोतल 30 रूपए और 8 रूपए कीमत की पेजीज़ 25 रूपए पानी की बोतल की कीमत यहंा भी 40 रूपए वसूली जा रही है और किसी भी ग्रहक को कोई रसीद नही मिलती है। सरकार चाहती है की देश की जनता को मंहगाई से निजात मिले लेकिन बेलगाम हो चुके मुनाफ़ा खोर सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे है। ये चन्द उदाहरण है। गैर कानूनी मुनाफ़ा खोरी का बाज़ार सिर्फ लखनऊ तक सीमित नही है मुनाफ़ा खोर ग्राहको से तो मनमानी मोटी कीमत वसूल रहे है लेकिन इसका फायदा सरकार को नही मिलता है। गैर कानूनी तरीके मूल्य निर्धारण कर जनता को ठगने वाले लोग दिन दूनी रात चैगनी तरक्की कर रहे है सम्बन्धित विभाग खामोशी अख्तियार किए हुए है। सरकार अगर इन मुनाफ़ा खोरो पर भी लगाम लगा ले तो शायद जनता को खाने पीने की तमाम वस्तुए सस्ती कीमत पर मुहैया हो जाए। सरकार को चाहिए कि जैसे म़ज़दूर की मज़दूरी का निर्धारण किया जाता है उसी तरह से देश मे बिकने वाली हर वस्तु के मुल्य का निरधारण करे । कम पूॅजी लगा कर मोटा मुनाफा कमाने वाले इन मुनाफ़ा खोरो के कारोबार की तरफ आयकर विभाग की नज़र भी नही जाती है । आयकर विभाग अगर ऐसे मुनाफा खोरो के छोटे दिखने वाले कारोबार से होने वाली आय की जाॅच करे तो ये मुनाफ़ा खोर आयकर के दायरे मे आकर सरकारी खज़ाने के लिए मुनाफ़े का सौदा साबित हो सकते है।  मनमानी की इन्तीहा है देश के प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी देश को स्वच्छ करने के लिए अभियान चला रहे है खुले मे शौच से जनता को बचाने के लिए हज़ारो करोड़ रूपए खर्च कर शौचालयो का निर्माण करा रहे है लेकिन शहरो मे चलने वाले सार्वजनिक शौचालय मनमानी पर उतारू है। लोगो को सुलभ शौच की व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए शहरो मे चल रहे सैकड़ो सुलभ सौचालयो में मूत्र और शौच के लिए मनमानी कीमत वसूली जा रही है जिसकी कोई रसीद भी नही मिलती है । कोई गरीब अगर सड़क के किनारे कही मूत्र करे तो गैर कानूनी है लेकिन अगर वो शौचलयो के अन्दर बने मूत्रालय का इस्तेमाल करता है तो उसे 5 रूपए अदा करने पड़ेगे जिसकी न तो उसे कोई रसीद मिलेगी और ये भी कोई गारन्टी नही कि मूत्र की सुविधा देकर जनता से वसूला गया पाॅच रूपए मे से कुछ पैसा सरकार को जाएगा भी या नही। शहरो मे चल रहे शौचालयो के संचालको ने मनमानी की इन्तिहा पार कर दी है जिस पर लगाम लगना ज़रूरी है।
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