Friday, April 3, 2026
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गुरु गोरक्षनाथ मंदिर से नेपाल का है गहरा नाता

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गुरु गोरक्षनाथ मंदिर से नेपाल का है गहरा नाता
मकर संक्रांति पर मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने आते हैं हज़ारों नेपाली श्रद्धालु
गोरखपुर। नाथ सम्प्रदाय के गुरु गोरक्षनाथ मंदिर से नेपाल का गहरा नाता है। इसकी झलक मकर सक्रांति में देखने को मिलती है, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु नेपाल से गोरखनाथ मंदिर आते हैं और खिचड़ी चढ़ाकर बाबा गोरखनाथ की पूजा अर्चना करते हैं। महीने भर चलने वाले इस आयोजन में नेपाल के श्रद्धालु आसानी से गोरखनाथ मंदिर पहुंच जाए इसके लिए महाराजगंज से नौतनवा से मेला स्पेशल ट्रेन और बसें चलाई जाती हैं । इस बार तीन मेला स्पेशल ट्रेनें और दर्जनों बसें चलाई जा रही हैं। खिचड़ी मेले की शुरुआत 14 जनवरी से होगी इससे पहले ही श्रद्धालु मंदिर पहुंच जाएंगे । मंदिर प्रबंधक का अनुमान है कि इस बार भी नेपाल से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आएंगे ।

गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ मंदिर की खिचड़ी गुरु गोरक्षनाथ को चढ़ाएंगे । इसके बाद नेपाल नरेश की खिचड़ी चढ़ाने की औपचारिकता पूरी की जाएगी। ये परम्परा यहां लंबे समय से चली आ रही है । इस बार महंत योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के रूप में पूजा पाठ करेंगे । मंदिर प्रबंधन का कहना है कि शुरुआती दिनों में गुरु गोरक्षनाथ नेपाल में ही अपनी धूनी रमाई थी, नेपाल में बहुत से लोग गुरु गोरक्षनाथ के संपर्क में आए और उनके अनुयाई बन गए । जिस क्षेत्र में गुरु गोरक्षनाथ ने निवास किया था वहां के लोगों को गोरखा भी कहा जाता है । गुरु गोरखनाथ मंदिर पर बाद के दिनों में भी अनुयायियों का विश्वास बना रहा और वह आज भी पूजा करने मंदिर आते रहते हैं । नेपाल के राजनेता और अधिकारी भी खिचड़ी मेला में हिस्सेदारी करने गोरखनाथ मंदिर आते हैं, इस बार भी राजनेताओं व नेपाली अधिकारियों के आने की उम्मीद है । पूर्वांचल के इस महत्वपूर्ण आयोजन की तैयारियों में पुलिस और जिला प्रशासन पूरी मुस्तैदी से लगा हुआ है । इस बार सैकड़ों पुलिस कर्मियों व लगभग 25 सीसी टीवी और कई ड्रोन कैमरों की निगरानी में मेला सकुशल सम्पन्न कराने की तैयारी है।
नेपाल के राज गुरु के रुप में पूज्य हैं गुरु गोरक्षनाथ
नेपालियों में राजवंश पर गुरु गोरख नाथ की असीम कृपा की कहानी प्रचलित है, कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ की कृपा से ही पृथ्वी नारायण शाह ने बाईसी देवता और चौबीसवीं देवी को पूजा था और इसी कारण नेपाल को एक ही छत के नीचे संगठित करने में सफलता हासिल की थी, इसी नाते नेपाल की राजमुद्रा में गोरखनाथ और जब तक राजतंत्र रहा तब तक राज मुकुटों में चरण पादुका का चिन्ह अंकित था, महायोगी गुरु गोरखनाथ नेपाल के राष्ट्र गुरु के रूप में भी पूज्य माने जाते।
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