कानपुर महानगर। मदीना मस्जिद पार्क के करीब मैं अंजुमन हजरते फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा के जेरे इहतमाम और कारी मोहम्मद याकूब बरकाती के सरपरस्ती में होने वाला तीसरा सालाना जश्ने ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम मनाया गया।

इसमें जाजमऊ व अतराफ की हजारों कनीजाने फातिमा ने शिरकत की। जिसमें खुसूसी मुकर्रिरा की हैसियत से आलिमा फाजिला शबीना नूरी ने खिताब फरमाया। मैसूफा का मौजू था सुप्रीम कोर्ट का फैसला और शरीयत मोसूफा ने फरमाया के सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक बेजा फैसला है। असल कानून तो अल्लाह के पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम लेकर तशरीफ़ लाए वही कानून अस्ल कानून है। इसी कानून पर तमाम इमान वालों को अमल करना फर्ज है। अब इस कानून के आगे कोई और कानून हरगिज़ नहीं चलेगा। कागजी तौर पर तो चल सकता है मगर दिल की तख्ती पर कभी नहीं चल पायेगा। और जो गुमराह किस्म की औरतों शरीयत के खिलाफ गलत बयानबाजी कर रही हैं शरीयत से और ईमान से कोई ताल्लुक नहीं है। हमारा दीन तो अमन व अमान वाला दीन है इसमें जबरदस्ती हो ही नहीं सकती कुरआन ए मुकद्दस में अल्लाह तबारक व ताला ने फरमा दिया। लाइक्राहा फिद्दीन इसी मौके पर मौजूद तमाम कनीजाने इस्लाम ने अपने हाथों को बुलंद करके मोसूफा की बातों की ताईद की जलसे में आलिमा फाजिला शाइस्ता खातून ने खिताब किया। अपने खिताब में फैशन का बाइकाट कर ने पर जूर दिया और ख्वातीन ए ने इस्लाम को शरीयत के मुताबिक जिंदगी गुजारने की तलकीन फरमाई मजीद कहा कि औरत को चाहिए कि सिर्फ अपने शौहर के लिए सज और संवर सकती है। और किसी के लिए सजना सवरना शादी ब्याह में जाने और बाजारों में घूमने के लिए शरीयत हरगिज इजाजत नहीं देती। आलिमा गौसिया फातिमा ने निजामत के फराइज अंजाम दिए नात व मनकबत के अशआर सना फातिमा व तययेबा खातून ने पेश किये। जलसे के आखिर में कुछ देर सवाल व जवाब की महफिल हुई सलातो सलाम व दुआ के बाद जलसे का इखतेताम हुआ जनाब शकील अहमद हाजी सईद व बब्बन भाई व शाकिर रजा व मल्लू भाई के घर की ख्वातीन ने तमामी हाजरीन की शिरकत करने का शुक्रिया अदा किया।
सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट





