लखनऊ। किसानों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय लोकदल का एक प्रतिनिधि मण्डल प्रदेष के महामहिम राज्यपाल महोदय से मिला और 5 सुत्रीय मांगो का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधि मण्डल में प्रदेष अध्यक्ष डाॅ0 मसूद अहमद, राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी, वंषनारायन सिंह पटेल, राष्ट्रीय सचिव षिवकरन सिंह, ओंकार सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे, प्रदेष कोषाध्यक्ष प्रो0 यज्ञदत्त शुक्ल, प्रदेष प्रवक्ता सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी, प्रदेष मीडिया प्रभारी जावेद अहमद तथा युवा राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चै0 वसीम राजा, प्रदेष सचिव मनोज सिंह चैहान तथा मनोज चैधरी और ज्ञानप्रकाष सिंह पटेल शामिल रहे।

ज्ञापन के पष्चात राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेष कार्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने पत्रकार बन्धुओं से वार्ता करते हुये कहा कि प्रदेष सरकार मूलतः किसान विरोधी है। प्रदेष के मुख्यमंत्री और देष के प्रधानमंत्री किसानों की आय दुगुनी करने तथा स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की बात भाषणों में करते हैं जबकि वास्तविक धरातल पर किसान इनकी नीतियों से निराष है। वर्तमान सत्र में ही गन्ना किसानों का लगभग 12000 करोड रूपया बकाया हो गया है उसकी ब्याज सहित भुगतान करने की तिथि मुख्यमंत्री ने आज तक नहीं घोषित की है और न ही पिछला बकाया ब्याज अब तक किसानों को भुगतान किया गया है। पिछले बकाया ब्याज के सन्दर्भ में माननीय उच्च न्यायालय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय भुगतान करने के पक्ष में आदेष कर चुका है।

श्री त्यागी ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा 7000 करोड का घोषित पैकेज भी किसानों को नहीं मिल सकेगा क्योंकि इसे एथेनाॅल बनाने के लिए खर्च किया जायेगा और अधिकारियों तथा मिल मालिकों में पूर्व की भांति बंदरबांट की जायेगी। प्रदेष सरकार द्वारा निजी हाथों को बेची गयी सहकारी व सरकारी क्षेत्र की चीनी मिलों के कई वर्षो बाद चालू न होने से किसान को अपना गन्ना निजी कोल्हुओं पर सस्ते दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ा है। इसी प्रकार आलू पर आयात शुल्क में केन्द्र सरकार द्वारा 10 प्रतिषत की कमी करने के कारण आलू का मूल्य भी कम होने लगा है आष्चर्य न होगा कि आलू पुनः सड़कों पर फेंका जाय।
रालोद महासचिव ने कहा कि प्रदेष के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना मठ चलाने और गायों को चारा खिलाने से फुरसत नहीं मिल रही है ऐसा लगता है कि योगी जी सत्ता भोगी हो गये हैं। उन्होंने मांग की कि योगी जी को त्याग पत्र देकर अपने नाथ सम्प्रदाय के प्रचार प्रसार में लिप्त रहना चाहिए।
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