BRIJENDRA BAHADUR MAURYA
मजलूमों, दलितों, किसानों को हक़ दिलाना पत्रकारिता का लक्ष्य हो : प्रो मंजूर अहमद

लखनऊ। राजधानी के प्रेस क्लब में सोमवार को हिन्दी- उर्दू प्रत्रकारिता विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रोफेसर तथा रिटायर्ड आईपीएस मंजूर अहमद ने पत्रकारिता पर प्रकाश ड़ालते हुए कहा कि पत्रकारिता का लक्ष्य गरीबों, पिछडों, दलितों, अल्पसंख्यकों, किसानों और मजलूमों को हक़ दिलवाने का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये कुछ ऐसे लोग है जो मुंह में जबान होते हुए भी बेजुबान है। सदियों से इन लोगों पर ज़ुल्म होता रहा और ये लोग जुल्म सहने के आदी हो गए। पत्रकारिता का उद्देश्य ऐसे ही लोगों को जुबान देने का होना चाहिए।
बतातें चलें कि मंजूर अहमद देश के पहले आईपीएस अधिकारी जो विभिन्न विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर के साथ प्रोफेसर रहे, लखनऊ मेयर का चुनाव लड़ा और अब सम्पादक की हैसियत से सन् 2011 से जन माध्यम अखबार निकाल रहे है।
राजनीति और समाज शास्त्र के शिक्षक मंजूर अहमद ने आगे कहा कि अखबार निकालना या पत्रकारिता करना कोई आसान काम नहीं है। जब आप दीन दुखियों की आवाज शासन प्रशासन तक पहुंचाते हैं तब आपको भारी दबाव में काम करना होता है और साथ ही बाजार की चुनौतियां भी आपके सामने आती है। सच से कभी मुंह न मोड़ने की बात करते हुए कहा कि सच्चाई का कोई विकल्प नहीं होता है और देर सबेर दुनिया आपको जानने पहचानने लगती है। लगातार मजलूमों की आवाज बने रहना एक गंभीर चुनौती है जिसका सामना करके ही सच्ची पत्रकारिता की जा सकती है। 1966 बैच के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी ने बताया कि सन् 1997 में वीआरएस लेने के बाद आगरा, जामिया और स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालयों में अध्यापन का कार्य करते रहे और आज इस उम्र में भी अखबार में प्रतिदिन सम्पादकीय लिख रहे हैं।
संगोष्ठी में भाषाई पत्रकारिता के साथ आज के दौर में पत्रकारिता के स्वरूप पर वक्ताओं ने अपने विचारों को व्यक्त किया। वक्ताओं में रिटायर्ड आईपीएस दारापुरी ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए मीडिया की निष्पक्ष भूमिका पर विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी में बिलाल, अशोक सिंह, शीबू निगम, रंजीव ठाकुर, मुईद सागरी, अल्ताफ़, राजीव शुक्ला आदि लोग मौजूद रहे।
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