Thursday, February 26, 2026
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HomeNationalमात्र तीन साल के अंदर ही  ग्रीनवुड अपार्टमेंट की चटकी दिवारें 

मात्र तीन साल के अंदर ही  ग्रीनवुड अपार्टमेंट की चटकी दिवारें 

मात्र तीन साल के अंदर ही  ग्रीनवुड अपार्टमेंट की चटकी दिवारें 
लखनऊ विकास प्राधिकरण के द्वारा बनाये गए ग्रीनवुड अपार्टमेंट की  दीवारे चटक रही है ,अपार्टमेंट में रहने वाले व्यक्तियों के साथ ही भाजपा सांसद दद्दन मिश्रा ने भी शिकायत करे चुके है लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुयी है।
,ये अपार्टमेंट मात्र तीन साल की बनवाई गयी है लेकिन इंजीनियर और एनएनसी कॉम्पनि के घोटाले व खराब मैटीरियल से दीवारे ख़राब हो  रही हैं। रहने वाले लोगों का मानना है ऐसी खराबी की वजह से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।  रहने वाले लोगों का ये भी कहना है की आवंटन होने से पहले आवंटित व्यक्ति का कहना है कि  इस अपार्टमेंट में पूल और पार्क ,देने की भी बात कही गयी थी मगर अभी तक ऐसा काम नंही हुआ है बल्कि इंजीनियर और नागार्जुन कंस्ट्रक्सन कॉम्पनि को जारी की गई नोटिस के बावजूद भी ऐसा देखने को मिल रहा हैं। 
 अपार्टमेंट में रहने वाले रामेश दत्त त्यागी का  कहना है कि मैं  2015 में आया हु खिड़की से पानी आता है,ऊपर सीलिंग हो जाती है और ऊपर टंकी भरने पर पानी आने लगता है ।
कमल चंद्र शुक्ला कहना है है कि छले साल 28 जनवरी को मैं आया था सबसे पहले मुझे 6 महीने तो हैंडओबर करने में लगा दिया , और जो घर की हालत है जिंदगीभर की कमाई को लगाकर घर खरीदता है आदमी बड़ा दयनीय स्थिति में रहता है ,किचन में खिड़की उल्टी लगाई  अलमारी उल्टी लगाई है , चौखट सारे हिल रहे है , दरवाजे की कुंडीया टूटी है , मैन एनएनसी  से सिकायत की कोई कार्यवाही नही करते ।
उमसंकर दुवे अलॉटी का कहना है कि पिछले 6 महीने पहले मैं आया हु आईडीआ ने जो भी वादा किया था पूरा नही किया , क्वालटी कंट्रोल कोई नही है , दिवाली चिटक रही टाइल्स गिर रही है , इसको लेकर एलडीए में दर्जनों बार सिकायत किया , मुख्यमंत्री के यहां सिकायत करी , एक सांसद जी ने भी सिकायत की है , अभी तक कोई कार्यवाही नही किया है एलडीए अस्वासन पे अस्वासन दे रही है , इतनी अनियमितता के कारण अभी भी बिल्डिंग हैंडवोबर नही किया गया है , बिल्डिंग जिस पोजीसन में है गिरने के कगार पर है , प्रत्येक फ्लैट में सीवर की दिक्कत है एनसीसी कहती है एलडीए करेगा एलडीए कहता है एनसीसी करेगा ।लखनऊ विकास प्राधिकरण लोगो को आवास देने के लिए तमाम दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। 
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