लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेष प्रवक्ता सुरेन्द्रनाथ त्रिवेदी ने भाजपा सांसद सुब्रहमण्यम स्वामी के वक्तव्य पर आक्रोष व्यक्त करते हुये कहा कि राम मन्दिर का केष मा0 सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित है और स्वामी का यह कहना कि केष हम जीत लेंगे पूर्णतः हास्यास्पद लगता है और साथ ही साथ एक प्रष्न भी उठता है कि स्वामी एवं भाजपा ने कहीं न्यायपालिका से किसी प्रकार का समझौता नहीं कर लिया है। वक्तव्य से ऐसा लगता है कि लोकतंत्र का तीसरा स्तम्भ क्या भाजपा के इषारे पर काम करेगा? साथ ही साथ ऐसा वक्तव्य देना क्या न्यायपालिका के प्रति अवमानना नहीं है?

श्री त्रिवेदी ने कहा कि तीन तलाक और धारा 370 जैसे मुददों को भी स्वामी ने हवा देने का प्रयास किया है जो समाज को अस्थिरिता की ओर ले जाने वाला एक कदम प्रतीत होता है। सम्पूर्ण देष में करोडों हिन्दू महिलाएं प्रत्येक जनपद में पारिवारिक न्यायालय में अनेको वर्षो से न्याय के लिए गुहार लगा रही है और उन्हें भरण पोषण तक नहीं मिल पा रहा है। यदि भारतीय जनता पार्टी और सुब्रहमण्यम स्वामी को देष की महिलाओं की चिंता करनी है तो पारिवारिक न्यायालयों की सुनवाई दिन प्रतिदिन फास्ट ट्रैक कोर्ट की तर्ज पर करायें और हिन्दू महिलाओं को शक्ति प्रदान करें। जुमलेबाजी से ही महिला सषक्तीकरण की बात करना भाजपा के प्रतिनिधियों का शौक बन गया है। वास्तविक धरातल सूना है और इनके राज्य में सूना ही रहेगा।
रालोद प्रदेष प्रवक्ता ने कहा कि समाज में सामाजिक समरसता लाने के लिए यह आवष्यक है कि देष में कानून का राज स्थापित होना चाहिए और यदि कोई व्यक्ति किसी भी धर्म के प्रति द्वेष के शब्दों का उच्चारण करता है तो उसके विरूद्व कानूनी धाराओं मे मुकदमा कायम करके जेल भेजा जाना चाहिए। देष में जिस प्रकार हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई एक समान हैं उसी प्रकार महिलाओं और पुरूषों में भी भेदभाव नहीं होना चाहिए। देष के संविधान में सभी धर्मो और सभी देषवासियों को समान अधिकार प्राप्त हैं।

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