जीवन में रोशनी भरने वाली शिक्षा अंधेरे में
– विद्या का सफर व्यवसाय तक
– शिक्षा के मंदिर में खुली दुकानों में खुलेआम लूट
कानपुर महानगर। बच्चे के जन्म से ही माता-पिता अनगिनत सपने बुनना शुरू कर देते हैं। जिसमें उनकी शिक्षा से लेकर उनके जीवन यापन की सभी विचार धारायें सम्मिलित होती हैं। माता पिता अपनी संतान के लिये कुछ भी कर गुजरने को हरदम तैयार रहते हैं। फिर कितना भी खर्च क्यों ना करना पड़े? आज के समय में कुछ लोग अपने मुनाफे की लालच में इनकी भावनाओं के साथ ही नहीं बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। सभी स्कूलो में आजकल नया शेषन प्रारम्भ हो गया है। और दाखिले की शुरुवात हो चुकी है। जहाँ पिछले कुछ वर्षों से शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है वहीँ इसका व्यवसायी करण भी भरपूर होता जा रहा है। जिसके कारण अभिभावकों को काफी दिक्कतों का सामना करना करना पड़ रहा है। इसके विरोध में ना सिर्फ अभिभावक सड़कों पर आ रहे हैं बल्कि अपना संगठन बना कर जमकर खिलाफत कर रहे हैं।

इसी के चलते आज भी अशोक नगर स्थित फातिमा इंटर कॉलेज में काफी हंगामा बरपा गया।
दाखिले को लेकर फातिमा में अभिभावकों की काफी भीड़ थी। जो दाखिले के बाद अपने बच्चों को छोड़ने आये थे। लेकिन स्कूल प्रबंधन द्वारा उनको बाहर ही रोक दिया गया। कारण पूँछने पर वहाँ पर मौजूद शिक्षिकाओं ने पहले 5000 जमा करने के लिये बोला और जब लोगों ने इसका विरोध किया तो उनसे कहा गया की वे अपने बच्चों को वापस ले जायें उनको अंदर नहीं आने दिया जायेगा जब तक रुपए नहीं जमा होते हैं। ऐसे में सभी अभिभावक पूरी तरह बिफर गये।
और रस्ता जाम कर दिया। हंगामा बढ़ने के कारण काफी मीडिया कर्मी भी मौके पर पहुंच गये। मीडिया को सामने देख कर स्कूल प्रशासन काफी परेशान हो गया। और आनन-फानन में मांगे जा रहे रुपयों की मांग को रोक दिया। उसके बाद ही अभिभावक शांत हुये। इस गहमा-गहमी में जब “अवधनामा” संवाददाता ने फातिमा की प्रिन्सिपल सिस्टर मारिया कीर्ति से कारण जानना चाहा तो उन्होंने स्वयं का बचाव करते हुये बोला की ये मेरा फैसला नहीं है। जो हमसे कहा जाता है हम वही करते हैं। और इस बात पर तो पहले ही रोक लगनी थी लेकिन हम कुछ करते उसके पहले ही इतना सब हो गया। आगे क्या किया जायेगा के जवाब पर प्रिन्सिपल ने कहा की तुरंत ही रोक लगाई गई है। किसी को स्कूल प्रबंधन द्वारा मांगे जा रहे 5000 रुपये नहीं देना है।
विद्यालय के इस फैसले के बाद अभिभावको में शांति हुई। लेकिन इतना जरूर है की योगी सरकार के अभिभावकों के हित में लिये फैसले को सभी विद्यालय तार-तार करने में लगे हैं। इनको किसी भी तरह का कोई डर नहीं है। और ना ही ये अपने क्रिया कलापों पर लगाम लगा रहे हैं। ऐसे में प्रशासन क्या कदम उठाता है ये वक्त की गर्त में है। लेकिन इतना जरूर है की इस तरह की शिक्षा के क्षेत्र में व्यवसायीकरण बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जरूर कर रहा है।

सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट
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