Tuesday, March 17, 2026
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इतने सालो से चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज से करेगा सुनवाई

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अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज से फिर से सुनवाई शुरू करने जा रहा है। अयोध्या में विवादित स्थल पर मालिकाना हक से जुड़े केस में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली पीठ आज से रोज सुनवाई करेगी। पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने साफ कर दिया था कि अब सुनवाई नही टाली जाएगी। इस मसले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से कपिल सिब्बल पक्ष रख रहे हैं। 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के बीच 3 बराबर-बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था।

अयोध्या विवाद की जड़ वहां है जब 1 फरवरी 1986 को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देते हुए कोर्ट ने ढांचे पर से ताला हटाने का आदेश दिया। इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया गया। 06 दिसंबर 1992 को बीजेपी, वीएचपी और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को गिरा दिया। देश भर में हिंदू-मुसलमानों के बीच दंगे भडक़े गए, जिनमें करीब 2,000 लोग मारे गए।
जानें अब तक क्या हुआ 
-1527: बाबर ने यहां बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया। हिंदू मान्यता के अनुसार इसी जगह पर भगवान राम का जन्म हुआ था।
-1853: हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहली हिंसा हुई। हिंदुओं का आरोप है कि भगवान राम के मंदिर को तोडक़र मस्जिद का निर्माण किया हुआ।
-1859: ब्रिटिश सरकार ने विवादित भूमि के आंतरिक और बाहरी परिसर में मुस्लिमों और हिदुओं को अलग-अलग प्रार्थनाओं की इजाजत दी।
-1885: मामला पहली बार अदालत पहुंचा। महंत रघुबर दास ने फैजाबाद अदालत में मंदिर के निर्माण के लिए अपील दायर की।
-5 दिसंबर, 1950: महंत परमहंस रामचंद्र दास ने बाबरी मस्जिद में राममूर्ति रखने के लिए मुकदमा दायर किया। मस्जिद को ‘ढांचा’ नाम दिया गया।
-1 फरवरी, 1976: फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिदुओं को पूजा की इजाजत दी और ताले दोबारा खोले गए।
-1 जुलाई, 1989: इस मामले में भगवान रामलला विराजमान नाम से एक और मुकदमा किया गया। यह 5वां मुकदमा था।
-25 दिसंबर, 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली।
-6 दिसंबर, 1992: हजारों की संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर ढांचा गिरा दिया। इसके बाद देश के तमाम हिस्सों में तनाव फैल गया।
-16 दिसंबर, 1992: विवादित ढांचा गिराने की जिम्मेदार स्थितियों की जांच के लिए लिब्रहान आयोग का गठन किया गया।
-जनवरी, 2002: तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वार्ता से विवाद सुलझाने के लिए अपने कार्यालय में एक अयोध्या प्रकोष्ठ शुरू किया।
-अप्रैल, 2002: अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।
-सितंबर, 2003: अदालत ने फैसला दिया कि मस्जिद के विध्वंस को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाए।
-जुलाई, 2009: लिब्रहान आयोग ने अपने गठन के करीब 17 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
-28 सितंबर, 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज की।
-30 सितंबर, 2010: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा। एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े को मिला।
-9 मई, 2011: इस मामले में देश के सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक के आदेश दिए।
-जुलाई, 2016: बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का 95 साल की उम्र में निधन हो गया। वह 1949 से इस मामले से जुड़े थे।
-21 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की बात कही। इसके बाद दोनों तरफ से कोशिशें शुरू हुईं।
-19 अप्रैल, 2017: सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।
-11 अगस्त 2017: सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे से जुड़े सभी कागजातों को अंग्रेजी में अनुवाद करने के आदेश दिए।
-5 दिसंबर 2017: सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की विशेष अदालत में विवादित मामले की फिर से सुनवाई शुरू की।
-8 फरवरी 2018: करीब दो महीने बाद इस मामले में फिर से सुनवाई होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट साफ कह चुका है कि अब इस मामले में सुनवाई नहीं टाली जाएगी।

https://www.youtube.com/watch?v=PBLx74WM1t8


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